शेर-ओ-शायरी

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न आने दिया राह पर रहबरों ने,
किये लाख मंजिल ने हमको इशारे।

-'अर्श' मल्सियान

 

1.रहबर-रास्ता दिखने वाला, पथप्रदर्शक


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न जाने किधर जा रही है यह दुनिया,
किसी का यहां कोई हमदम नहीं है।

 

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नई दुनिया में कुछ बीते दिनों के भी निशाँ होंगे,
अजाइबखानों में रखेंगे, दीनों को ईमानों को।

-साहिर लुधियानवी


1.दीन-धर्म, मजहब 2.ईमान - ईमानदारी, अकीदा


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नहीं अपने किसी मकसद से खाली कोई भी सिज्दा,
खुदा के नाम से करता है इंसौ बंदगी अपनी।


 

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