शेर-ओ-शायरी

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 नहीं अपने किसी मकसद से खाली कोई भी सिज्दा,
खुदा के नाम से करता है इंसौ बंदगी अपनी।

 

1.सिज्दा -इश्वर के लिए सर झुकाना, नमाज़ में सर ज़मीन

 पर रखना   

 


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नाअहल हैं वह अहले-सियासत की नजर में,
वादे से कभी जिसको मुकरना नहीं आता।

-जोश मल्सियानी


1.नाअहल - अयोग्य, नाकाबिल, अपात्र, गैर-मुस्तहक 2. अहले-सियासत - राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ, पालिटिसियन

 

 

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पलकों से गिर न जाए ये मोती संभाल लो,
दुनिया के पास देखने वाली नजर नहीं।

-रसीद सीमी


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फिराक इक-इक से बढ़कर चारासाजे -दर्द हैं लेकिन,
यह दुनिया है यहाँ हर दर्द का दरमां नहीं मिलाता।

-फिराक गोरखपुरी


1.चारासाजे-दर्द- दर्द का इलाज करने वाला, चिकित्सक 2.दरमां - इलाज करने वाला, चिकित्सक

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