शेर-ओ-शायरी

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बंदे न होंगे जितने, खुदा है खुदाई में,
किस-किस खुदा के सामने सिज्दा करे कोई।


1.खुदाई - संसार, दुनिया 2.सिज्दा - ईश्वर के लिए  सर झुकाना,

 नमाज में जमीन पर सर रखना


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बकद्रे-होश हर इक को यहाँ रंज मिलता है,
सुकून से रहते है यहाँ सिर्फ दीवाने।

1.बकद्रे-होश - संवेदनशील
 

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बफैजे-मस्लेहत ऐसा भी होता है जमाने में,
कि रहजन को अमीरे-कारवां कहना ही पड़ता है।

- जनगन्नाथ आजाद


1.बफैजे-मस्लेहत - दुनियादारी के कारण 2.रहजन –लुटेरा, डाकू 3.अमीरे-कारवां - कारवों का सरदार


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बरसी वहीं वहीं पर समन्दर थे जिस जगह,
ऊपर से हुक्म था तो घटाएं भी क्या करें।

 

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