शेर-ओ-शायरी

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वह बड़े खुशनसीब इन्साँ हैं ,
जिनकी कश्ती को नाखुदा न मिला।

-अब्दुल हमीद 'अदम'

 

1.नाखुदा-मल्लाह, कर्णधार


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वह की खुलूस की तौहीन अहले-दुनिया ने,
जुबाँ पै लफ्जे-मुहब्बत गराँ  गुजरता है।

- निहाल सेहरारवी


1. अहले-दुनिया
ने - दुनिया वालों ने 2.गराँ  - भारी

 

 

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वहीं हजारों बहिश्तें भी हैं खुदाबंदा ,
सिसक-सिसक के कटी मेरी जिन्दगी जहां।

-बहार

 

1.बहिश्त- स्वर्ग, जन्नत 2.खुदाबंद- हे इश्वर, हे खुदा


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वही इन्सां जिसे सरताजे – मख्लूकात होना था,
वही अब सी रहा है अपनी अज्मत का कफन साकी।

-जिगर मुदाराबादी


1.सरताजे–मख्लूकात - सभी प्राणियों का शिरोमणि 2.अज्मत - बड़प्पन, महानता

 

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