शेर-ओ-शायरी

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अहले-चमन को कैदे - कफस की है आरजू,
सैयाद से भी बढ़के सितम बागबाँ के हैं।

-ताजवर नजीबाबादी


1.अहले-चमन - चमन में रहने वाले 2. कैदे-कफस - पिंजड़े में कैद (पंछी) 3.सैयाद - बहेलिया 4.सितम - जुल्म, अत्याचार

 

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अहले-जुबां भी आखिर गूंगे बने हुए हैं,
जिन्दा रहेंगे कब तक, मुर्दा जमीर लेकर।


1.अहले-जुबां - जुबान वाले यानी खुदा ने जिन्हें बोलने के लिए जुबान दी है

 

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आज किस सतह पे है जेहनीयते-आम अफसोस,
रोकता है जो खताओं से वही खतावार है।

-आनन्द नारायण मुल्ला


1. जेहनीयते -आम  -आम लोगों की सोच
 

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आज है किस मंजिल पै इंसान,
दिल में अंधेरा, रूख पै उजाले।


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