शेर-ओ-शायरी

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हमने कांटों को भी नरमी से छुआ है लेकिन,
लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते है।


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हमारे अहद के इन्सान है जहीन बहुत,
जमीर बेचकर शोहरत खरीद लेते हैं।


1.अहद- समय,जमाना,युग 2.जहीन- अक्लमंद, होशियार

 

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हर एक सम्त जहाँ पत्थरों की बारिश है,
वहाँ यह हुक्म कि शीशे का कारोबार करें।


1.सम्त - ओर, दिशा, तरफ


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हर जीन्स के ख्वाहाँ मिले बाजारे-जहां में,
लेकिन न मिला कोई खरीदारे-मुहब्बत।


1.जीन्स–चीज 2. ख्वाहाँ - चाहने वाला, ख्वाहिश रखने वाला
 

 

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