शेर-ओ-शायरी

<< Previous  ज़माना [Modern times (as opposed to older ones)]      Next>>

हर मोड़ पै मिल जाते हैं हमदर्द हजारों,
शायद हमारी बस्ती में अदाकार बहुत हैं।


*****


हर लिया है किसी ने सीता को,
जिन्दगी है कि राम का बनवास।

-फिराक गोरखपुरी

 

*****

हरीफ बन के मुकाबिले में जब आ सका न जहां,
तो दोस्त बनके पसे - पुश्त वार किया।

-आनन्द नारायण मुल्ला


1.हरीफ- प्रतिद्वन्द्वी 2. पसे–पुश्त - पीठ पीछे


*****


हवाएं बदल गई हैं इस कदर जमाने की,
दुआएं माँग रहा हूँ होश में न आने की।

 

*****

 

<< Previous     page-1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33   Next>>