शेर-ओ-शायरी

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हुए हैं इस कदर खम जमाने के हाथों,
कभी तीर थे अब कमां हो गए है।


1.खम - वक्र, टेढा 2.
कमां-धनुष


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है चमक तेरी जबीं पर जरा दिल भी देख जाहिद,
जो जगह है रौशनी के लिए वहीं रौशनी नहीं।


1.जबीं - माथा 2.जाहिद-जितेन्द्रिय ,संयमी, संयम-नियम और

जप-तप करने वाला व्यक्ति


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होता नहीं है कोई बुरे वक्त में शरीक,
पत्ते भी भागते हैं खिजां में शजर से दूर।

-असीर


1.खिजां - पतझड़ का मौसम 2. शजर - पेड़, वृक्ष

 

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