शेर-ओ-शायरी

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आसमानों से फरिश्ते जो उतारे जाए

वह भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएं।

 

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इक नहीं मांगी खुदा से आदमीयत की रविश
और हर शै के लिए बंदे दुआ करते रहे।

-दीवाना' मोहन सिंह -

 

1रविश - शैली, तर्ज, आचार-व्यवहार

2शै - चीज

 

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इधर सैयाद फिरते थे उधर सैयाद फिरते थे,
कुछ अंदाज से मेरे गुलिस्तां में बहार आई।

-जगन्नाथ आजाद


1.सैयाद - बहेलिया 2.गुलिस्तां - बगिया,बगीचा, उपवन
 

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इधर-उधर, यहाँ-वहाँ हैं बिजलियाँ ही बिजलियाँ,
चमन-चमन कहाँ फिरूँ मैं आशियाँ लिये हुए।


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