शेर-ओ-शायरी

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इन उजालों ने तो तहजीब मिटाकर रख दी
इससे तो अच्छा था हर सम्त अंधेरा होता

 
1हजीब - सभ्यता

2सम्त - ओर

 

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इन्सान ने महरोमाह की राहें तो देखली,
खुद उसकी अंजुमन में चरागाँ न हो सका।


1.महरोमाह - चांद, सूरज 2.अंजुमन - महफिल

3.चरागाँ - रोशनी, प्रकाश

 

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इन्सान का लहू पीना यह रस्म आम है,
अंगूर की शराब का पीना हराम है।
 

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इन्सानियत की रौशनी गुम हो गई कहाँ,
साए हैं आदमी के मगर आदमी कहाँ।


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