शेर-ओ-शायरी

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आजकिस सतह पे है जेहनीयते-आम अफसोस,
रोकता है जो खताओं से वही खतावार है।

-आनन्द नारायण मुल्ला


1. जेहनीयते - आम लोगों की सोच

 

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खूबियाँ लाख किसी में हों तो जाहिर न करें,
लोग करते हैं बुरी बात का चर्चा कैसा।

-दाग
 

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गुजरती है बशर की जिंदगी किन-किन खयालों में,
जो ऐसा हो तो वैसा हो, जो वैसा हो तो ऐसा हो।
-'नूह' नारवी


1.बशर - मनुष्य

 

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डाली गई न अपने गिरेबान पर नजर,
दुनिया हमारे दाग मगर देखती रही।
-साजन पेशावरी


1.गिरेबान - (i) कुर्ते-कमीज आदि का गला (ii) ग्रीवा,गला

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