शेर-ओ-शायरी

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कल जो अपने थे अब पराये हे, क्या सितम आसमाँ ने ढाये है,
दिल दुखा होंठ मुस्कराये है, हमने ऐसे भी गम उठाये हैं।

-'बेताब' अलीपुरी


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कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,
दोनों जहां की सैरें, हासिल है सब यहीं से।

-जिगर मुरादाबादी


1.सरजमीं - (i) पृथ्वी, जमीन (ii) देश, मुल्क

 

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कांटों से घिरा रहता है चारों तरफ से फूल,
फिर भी खिला ही रहता है, क्या खुशमजाज है।


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कारगाहे-हयात में ऐ दोस्त यह हकीकत मुझे नजर आई,
हर उजाले में तीरगी देखी, हर अंधेरे में रौशनी पाई।
-जिगर मुरादाबादी


1.कारगाह - कार्यालय, काम करने का स्थान 2. हयात - जिन्दगी 3.तीरगी - अंधेरा, अंधकार


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