शेर-ओ-शायरी

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कितनी बेकैफ कट रही है हयात,
एक मुद्दत से दिल उदास नहीं।

-कृष्ण मोहन'मोहन'


1.बेकैफ - आनन्दरहित, बिना मस्ती के, जिसमें मस्ती न हो

2. हयात - जिन्दगी


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किसको होती है अता इस शान की बर्बादियाँ,
आशियाँ हम क्या बचाते, बिजलियाँ देखा किए।


1.अता - प्राप्त 2. आशियाँ - घोंसला, नीड़

 

 

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कुछ इस अदा से यार ने पूछा मेरा मिजाज,
कहना ही पड़ा शुक्र है परवरदिगार का।

-'जलील' मानिकपुरी


1.परवरदिगार - ईश्वर, परमात्मा, खुदा


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कुछ दिन की और कश्मकशे-जीस्त है 'असर',
अच्छी बुरी गुजरनी थी, जैसी गुजर गई।

-'असर' लखनवी


1.कश्मकश - (i) खींचातानी, आपाधापी (ii) संघर्ष, लड़ाई (iii) दौड़धूप, पराक्रम 2. जीस्त - जिन्दगी

 

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