शेर-ओ-शायरी

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कुछ लोग जमाने में ऐसे भी होते है,
महफिल में जो हंसते हैं तन्हाई में रोते हैं।

-सागर


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कुछ हसीं ख्वाब और कुछ आँसू,
उम्र भर की मेरी यही कमाई है।

-मजहर इमाम


1.ख्वाब - (i) सपना (ii) नींद

 

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कैफे -निशाते-दर्द का आलम न पूछिए,
हंसकर गुजार दी है शबे-गम कभी-कभी।
-'शकील' बदायुनी


1.कैफे-निशाते-दर्द- दर्द से प्राप्त आनन्द का नशा

2. आलम- (i) हालत, दशा (ii) दुनिया 3. शबे-गम- जुदाई की रात,

तकलीफ की घड़ी


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कोई कशिश तो है इस गरीबखाने में,
तमाम दहर के आलाम आये बैठे हैं।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.कशिश - (i) आकर्षक, खिंचाव (ii) रोचकता, दिलकशी

2. दहर - दुनिया, संसार 3. आलाम - अलम का बहुवचन, कष्ट-समूह,

 दुख, तकलीफ, गम


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