शेर-ओ-शायरी

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खताओं पर खतायें हो रही थीं नावक-अफगन से,
इधर तीरों से बनता जा रहा था आशियाँ मेरा।


1.नावक-अफगन - तीरन्दाज, तीर चलाने वाला 2. आशियाँ - घोंसला, नीड़


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खलिश ने दिल को मेरे, कुछ मजा दिया ऐसा,
कि जमा करता हूँ खार आशियानों के लिये।

-त्रिलोकचन्द 'महरूम'


1.खलिश - पीड़ा, दर्द, टीस 2.खार - कांटा

 

 

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खा-खा के शिकस्त फतह पाना सीखो,
गिरदाब में कहकहा लगाना सीखो।
इस दौरे-तलातुम में अगर जीना है,
खुद अपने आप को तूफान बनाना सीखो।

- नजीर बनारसी


1.शिकस्त - हार 2. फतह - जीत, विजय 2. गिरदाब - भंवर 3. दौरे-तलातुम - पानी का मौजें मारना , बाढ़, तुग्यानी


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खामोशी में मुसीबत और भी संगीन होती है,
तड़प ऐ दिल तड़पने से जरा तस्कीनहोती है।

-शाद अजीमाबादी


1.
संगीन- सख्त, कड़ा, कठोर 2.तस्कीन-(i) सांत्वना, ढाढस, दिलासा

(ii) संतोष, इत्मीनान (iii) पीड़ा और दर्द में कमी, आराम
 

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