शेर-ओ-शायरी

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खिजाँ आयेगी तो आयेगी ढलकर बहारों में,
कुछ इस अन्दाज से नज्मे-गुलिस्ताँ कर रहा हूँ मैं।

-शफक टौंकी


1.नज्म - प्रबन्ध, व्यवस्था


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खुद अपनी बेबसी की उड़ाई है यूँ हँसी,
आये जो अश्क आंखों में हम मुस्करा दिये।

-मौज

 

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खुदा की देन है जिसको नसीब हो जाये,
हर एक दिल को गमे-जाविदाँ नहीं मिलता।

-'असर' सहबाई


1. गमे-जाविदाँ - न खत्म होने वाला गम


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खुदा या नाखुदा अब जिसको चाहो बख्श दो इज्जत,
हकीकत में तो कश्ती इत्तिफाकन बच गई अपनी।

-गोपाल मित्तल


1.नाखुदा-मल्लाह  2.कश्ती - नौका, नाव
 

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