शेर-ओ-शायरी

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खूगरे - दर्द हो अगर इन्सां,
रंज में भी मजा है राहत का।

-असर लखनवी


1.खूगरे–दर्द- गम सहने का आदी


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खूब था पहले से होते जो हम अपने बादाख्वाह,
कि भला चाहते हैं, और बुरा होता है।

-मिर्जा गालिब


1.खूब - सुन्दर, उत्तम 2. बादाख्वाह - बुरा चाहने वाला

 

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गम और खुशी में फर्क न महसूस हो जहाँ,
मैं दिल को उस मुकाम पै लाता चला गया।
बर्बादियों का सोग मनाना फिजूल था,
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया।
-'साहिर' लधियानवी

 

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गमे-जहाँ हो, गमे-यार हो कि तेरे सितम,
जो आये, आये कि हम दिल कुशादा रखते हैं।

-फैज अहमद 'फैज'


1.सितम - अत्याचार, जुल्म 2. कुशादा - चौड़ा, फैला हुआ, विस्तृत (यानी फराखदिल, दरियादिल, उदार हृदय)


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