शेर-ओ-शायरी

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'गालिब' बुरा न मान जो वाइज बुरा कहे,
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें ।
-मिर्जा गालिब


1.वाइज - धर्मोपदेशक


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गिरते हैं शहसवार ही मैदाने - जंग में,
वो तिफ्ल क्या गिरेंगे, जो घुटनों के बल चलें।


1.शहसवार - घोड़े की बहुत अच्छी सवारी करने वाला 2.तिफ्ल - बालक, बच्चा

 

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गुजरे हुए जमाने का अब तजकिरा क्या,
अच्छा गुजर गया बहुत अच्छा गुजर गया।


1. तजकिरा - जिक्र, चर्चा


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गुलों के साये में अक्सर 'रियाज' तड़पा हूँ,
करार कांटों पै कुछ ऐसा पा लिया मैंने।

-'रियाज' श्यामनगरी

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