शेर-ओ-शायरी

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चार दिन की बात है क्या दुश्मनी, क्या दोस्ती,
काट दो इसको खुशी से यार हंसते - हंसते।

-गुमनाम भरतपुरी


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जफा सैयाद की अहले - वफा ने रायगां कर दी,
कफस की जिन्दगी वक्फे-खयाले-आशियाँ कर दी।

-आनन्द नारायण मुल्ला


1.जफा - जुल्म, अत्याचार 2.सैयाद- बहेलिया, चिड़ीमार, आखेटक 3.अहले – वफा - वफा निभाने वाला 4.रायगां - व्यर्थ, बेकार 5.कफस - पिंजड़ा

6. वक्फे-खयाले-आशियाँ - आशियाँ के खयाल में व्यतीत
 

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जब कोई ताजा चोट खाते हैं,
अहले-दिल फिर भी मुस्कराते हैं।

-नरेश कुमार 'शाद'


1.अहले-दिल - दिल वाले


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जमाना उसकी तबाही पै किस लिये राये,
जो आप अपनी तबाही पै मुस्कुराता है।

 

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