शेर-ओ-शायरी

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अभी आस टूटी नहीं है खुशी की,
अभी गम उठाने को जी चाहता है।
तबस्सुम हो जिसमें निहाँ जिन्दगी का,
वह आंसू बहाने को जी चाहता है।
-'अदीब' मालीगाँवी

1.तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट 2.निहाँ - छुपा हुआ।


असीरों के हक में यही फैसला है,
कफस को समझते रहें आशियाना।
-दिल शाहजहांपुरी

1.असीर - बंदी, कैदी 2.कफस - पिंजड़ा, कैद

3. आशियाना - घोंसला, नीड़
 

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आज तारीकिए-माहौल से दम घुटता है,
कल खुदा चाहेगा 'तालिब' तो सहर भी होगी।
-तालिब देहलवी

1.तारीकी- अंधकार, अंधेरा, धुंधलापन 2. सहर - सुबह, सबेरा

 

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आता है जज्बे-दिल को यह अंदाजे-मैकशी,
रिन्दों में रिन्द भी रहें,दामन भी तर न हो।
-जोश मल्सियानी

1.जज्बे-दिल - दिल की कशिश 2. अंदाजे-मैकशी - शराब पीने का अंदाज 3.रिन्द - शराबी


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