शेर-ओ-शायरी

<< Previous  जिंदादिली (A tendency of mind to remain happy in all situations) Next>>

न तीर कमां में है, न सैयाद कमीं में,
गोशे में कफस के मुझे आराम बहुत है।

-मिर्जा गालिब


1.कमां - धनुष, धनु, तीर चलाने का यंत्र 2. सैयाद - चिड़ीमार, बहेलिया, शिकारी 3. कमीं - वह गुप्त स्थान जहाँ किसी की ताक में छिपकर

 बैठा जाए, आड़, घात में, शिकार की ताक में छिपकर बैठने का स्थान

4. गोशा - कोना 5. कफस - पिंजड़ा, कारागार


*****


न मौजें, न तूफां, न माझी,न साहिल,
मगर मन की नैया बही जा रही है।
चला जा रहा है वफा का मुसाफिर,
जिधर भी तमन्ना लिये जा रही है।


1. साहिल - किनारा, तट 2. वफा - (i) प्रतिज्ञा-पालन (ii) भक्ति, वफादारी (iii) निर्वाह, निबाह (iv) स्वामी या मित्र के साथ तन, मन, धन से निबाहना

 और कड़े से कड़े समय पर उसका साथ देना
 

*****

न लुटता दिन को तो कब रात को यूँ बेखबर सोता,
रहा खटका न चोरी का, दुआ देता हूँ रहजन को।

-मिर्जा गालिब


1.रहजन - लुटेरा, बाटमार


*****


नग्माहाए-गम को भी ऐ दिल गनीमत जानिए,
बेसदा हो जायेगा यह साजे-हस्ती एक दिन।

-मिर्जा गालिब


1. नग्माहाए-गम - गमों के गीत 2. बेसदा - बेआवाज, खामोश

 

*****

                 

<< Previous    page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10 -11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28- 29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46  Next>>