शेर-ओ-शायरी

<< Previous  जिंदादिली (A tendency of mind to remain happy in all situations) Next>>

पढ़े जो गौर से तारीख के वरक हमने,
आँधियों में भी जलते हुए चराग मिले।


1.तारीख - इतिहास 2. वरक - पन्ने


*****


पस्त कहता नहीं मैं पस्ती को,
अपनी तबिअत बुलंद रखता हूँ।

-'अख्तर' अंसारी


1.पस्त - (i) नीचा (ii) लघु, छोटा (iii) नीच, अधम, कमीना

 2. पस्ती - (i) निचाई, निशेब (ii) नीचता, कमीनगी
 

*****

पाल ले इक रोग नादां जिन्दगी के वास्ते,
वरना सेहत के सहारे जिन्दगी कटती नहीं।


*****


फस्ले-गुल की बरहनगी है वह,
लोग जिसको खिजाँ समझते हैं।

-अब्दुल हमी अदम


1.फस्ले-गुल - वसन्त ऋतु 2. बरहनगी - नग्नता, नंगापन

3. खिजाँ - पतझड़ की ऋतु

*****

                 

<< Previous   page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10 -11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28- 29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46 Next>>