शेर-ओ-शायरी

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आदमी को सिर्फ वहम है, पास उसके ही इतना गम है,
पूछो हंसते हुए चेहरों से, आंख भीतर से कितनी नम है।
 

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इक तबस्सुम हजार शिकवों का,
कितना प्यारा जवाब होता है।


1.तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट
 

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इक न इक जुल्मत से जब वाबस्ता रहना है 'जोश',
जिन्दगी पर साया - ए -जुल्फे-परीशाँ क्यों न हो।

-जोश मलीहाबादी


1.जुल्मत - अंधियारा, अंधेरा, अंधकार, तिमिर 2. वाबस्ता - जुड़ा रहना 3. साया-ए-जुल्फे-परीशाँ - बिखरी जुल्फों का साया
 

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इक नई बुनियाद डालेंगे तजस्सुम की 'शफा',
हर गुबारे-कारवाँ में कारवाँ ढूंढ़ेंगे हम।

-शफा ग्वालियरी


1.तजस्सुम - खोज, तलाश 2. गुबार - धूल, रज, गर्द।

 

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