शेर-ओ-शायरी

<< Previous  जिंदादिली (A tendency of mind to remain happy in all situations) Next>>

फूल वही, चमन वही, फर्क नजर - नजर का है,
अहदे-बहार में क्या था, दौरे-खिजाँ में क्या नहीं।

-'जिगर' मुरादाबादी


1.अहदे-बहार- बहार का मौसम 2. दौरे-खिजाँ- पतझड़ ऋतु


*****


बढ़ने दिये नहीं कभी दुनिया के हौसले,
जब कभी चोट खाये हैं, हम मुस्कराये हैं।

 

*****

बर्क क्या बर्बाद कर सकती है मेरा आशियाँ,
बल्कि यूँ कहिए कि रौशन आशियाँ हो जायेगा।


1.बर्क - बिजली, चपला, सौदामिनी 2. आशियाँ - घोंसला


*****
बहला रहे हैं अपनी तबिअत खिजाँ-नसीब,
दामन पै खींच-खींच कर नक्शा बहार का।

-'दिल' शाहजहाँपुरी


1.खिजाँ - पतझड़ की ऋतु


*****

                 

<< Previous    page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10 -11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46  Next>>