शेर-ओ-शायरी

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बहुत से लोग बस अपने दुखों की गीत गाते है,
कि होली हो या दिवाली सदा मातम मनाते हैं।
मगर दुनिया उन्हीं की रागिनी पै झूमती देखी
जो जलती चिता पर बैठकर वीणा बजाते हैं।


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बागे-हस्ती में सबक लें, फूल से अहले-नजर,
जिसने कि, की उम्र, तबस्सुम से बसर खारों में।

-कौसर


1.अहले-नजर - समझदार, पारखी 2. तबस्सुम - मुस्कान

3.खार - कांटा
 

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बिछड़ कर कारवाँ से मैं कभी तन्हा नहीं रहता,
रफीके-राह बन जाती है गर्दे-कारवाँ मेरी।

-'जलील' मानिकपुरी


1.रफीके-राह - सहयात्री, सहचर, हमसफर, साथ चलने वाला

2.गर्दे - धूल, रज, गर्द


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बिजलियाँ भी टूटेंगी, जलजले भी आयेंगे,
फूल मुस्कराये हैं और फूल मुस्करायेंगे।


1.जलजला- भूकंप, भूचाल

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