शेर-ओ-शायरी

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महफिल से उठवाने वालों तुम लोगों पर क्या इल्जाम,
मेरे साथी, मेरे साथी, मेरे साथी खाली जाम।

-साहिर लुधियानवी


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माँगते हैं जमाने की खुशियाँ,
खुद तरसते हैं इक हंसी को हम।

 

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माना कि इस जमी को न गुलजार कर सके,
कुछ खार कम तो कर गये गुजरे जिधर से हम।


1.गुलजार - वह स्थान जहां खूब चहल-पहल और रौनक हो,

उद्यान, वाटिका


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मुझको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन,
दिल खुश रखने को 'गालिब' ये ख्याल अच्छे हैं।

-मिर्जा गालिब

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