शेर-ओ-शायरी

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मुझको तो खुद तबाहियाँ अपनी पसंद हैं,
बिजली तड़प रही है क्यों आशियाँ से दूर।

-'बहजाद' लखनवी


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मुझसे हर बार मसर्रत ने छुड़ाया दामन,
मुझको सौ बार दिया गम ने सहारा।


1.मसर्रत - हर्ष, खुशी, आनन्द

 

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मेरे ताइरे-कफस को नहीं बागबाँ से रंजिश,
मिले घर में आबोदाना तो यह दाम तक न पहूंचे।

-शकील बदायुनी


1.ताइरे-कफस- पिंजड़े में कैद पंछी 2. बागबाँ- माली

3.आबोदाना- अन्न-जल 4.दाम- फंदा, पाश, जाल

 

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मुझे बहिश्त से इन्कार की मजाल कहाँ,
मगर जमीं पर महसूस यह कमी तो करूँ।


1.बहिश्त -स्वर्ग, जन्नत 2. मजाल - शक्ति, बल, साहस, हिम्मत


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मुस्कुराहट में छिपाते हैं जो अपने गमों को,
वो अपनी हालत पै औरों को रूला देते हैं।


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