शेर-ओ-शायरी

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मेरे लबों का तबस्सुम तो सबने देख लिया,
जो दिल पै बीत रही है वो कोई क्या जाने।


1.तबस्सुम - मुस्कान


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मेरे शौके-सजा का यह खौफनाक अंजाम तो देखो,
किसी का जुर्म हो, अपनी खता मालूम होती है।

-आजाद अंसारी

 

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मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया,
हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया।
जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया,
जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया।
गम और खुशी में फर्क न महसूस हो जहाँ,
मैं दिल को उस मुकाम पै लाता चला गया।
बर्बादियों का सोग मनाना फिजूल था,
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया।

-'साहिर' लुधियानवी

 

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मैं हुआ बर्बाद अपने शौक से,
आप पर तो मुफ्त का इल्जाम है।

-शंकर जोधपुरी

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