शेर-ओ-शायरी

<< Previous  जिंदादिली (A tendency of mind to remain happy in all situations) Next>>

रफ्ता-रफ्ताजो बदल दे खुद जमाने का मिजाज,
शौक के जज्बों में वह तासीर भी रखते हैं हम।
अपने कातिल आप है, अपने मसीहा आप हैं हम,
जहर भी रखते हैं हम, इक्सीर भी रखते हैं हम।

-गुलाम रब्बानी 'ताबाँ'


1. रफ्ता-रफ्ता - धीरे-धीरे, आहिस्ता-आहिस्ता 2. मिजाज - (i) स्वभाव, आदत, प्रकृति, तबिअत (ii) जी, मन 3. शौक - अभिलाषा, चाह, उत्कंठा 4. जज्बा - भावना, मनोवृति  5. तासीर - असर, प्रभाव 6. मसीहा - हजरत ईसा

जो मुर्दों को जिला देते थे, दुख-दर्द दूर करने वाला

7. इक्सीर - (i) रसायन (ii) अमोघ, अचूक


*****


रूला सकी न अजीयत कोई जमाने की,
मैं क्या करूँ, मुझको आदत है मुसकराने की।


1.अजीयत - दुख, तकलीफें, यातनाएं

 

*****

रौशनी में और दो तिनके जमा कर लेता हूँ मैं,
कौंधती है जब बिजली अपने निशेमन के करीब।

-'असर' उस्मानी


1.निशेमन - आशियाना, घोंसला, नीड़


*****


रौशनी, रौशनी सही, तीरगी में भी नूर होता है,
रूहे-एहसास हो लतीफ, तो हर खलिश में सरूर मिलता है।


1.तीरगी- अंधेरा, अंधियारा 2. नूर -(i) प्रकाश, ज्योति, आभा, रौशनी, उजाला (ii) शोभा, छटा, रौनक (iii) चेहरे की आबोताब, मुखछटा 3. लतीफ - (i) कोमल,

 नर्म (ii) मृदुल, नाजुक (iii) पवित्र, पाकसाफ 4. खलिश - दर्द की

 चुभन या टीस, पीड़ा, दर्द 5. सरूर - हल्का नशा

*****

 

<< Previous    page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10 -11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-46  Next>>