शेर-ओ-शायरी

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इन बेनियाजियों पै दिल है रहीने-शौक,
क्या जाने इसको क्या हो, जो परवा करे कोई।
-त्रिलोकचन्द महरूम


1.बेनियाजी- उपेक्षा, अनदेखी, बेरूखी

2. रहीने-शौक - उत्साहित, लालायित
 

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इन्हीं गम की घटाओं से खुशी का चाँद निकलेगा,
अंधेरी रात के पर्दों में दिन की रौशनी भी है।
 

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इन्हीं जर्रों से कल होंगे नये कुछ कारवाँ पैदा,
जो जर्रे आज उड़ते हैं गुबारे-कारवाँ होकर।
-'शफक' टौंकी

 

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इशरतकदे को खाना-ए-वीरां बनायेंगे,
छोटे से अपने घर को बियाबाँ बनायेंगे।
-मिर्जा गालिब


1. इशरतकदा - आनन्द महल, रंगभवन
, रंगशाला, रंगमहल
2. खाना-ए-वीरां - वीरान घर
3. बियाबाँ - जंगल, कानन


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