शेर-ओ-शायरी

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लुत्फे–बहार कुछ नहीं गो है वही बहार,
दिल क्या उजड़ गया कि जमाना उजड़ गया।

-आर्जू लखनवी
 

1.लुत्फे - आनन्द, मजा

 

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ले दे के अपने पास फकत इक नजर तो है,
क्यों देखें जिन्दगी को किसी की नजर से हम।
माना कि इस जमीं को न गुलजार कर सके,
कुछ खार कम तो कर गये, गुजरे जिधर से हम।

-'साहिर' लुधियानवी

 

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वह शाखे-गुल पै हों या किसी की मैयत पर,
चमन के फूल तो आदी हैं मुस्कुराने के लिये।


1.शाखे-गुल - (i) फूलों की डाली, (ii) प्रेमिका, माशूक 2. मैयत - मृतक, मरा हुआ आदमी

 

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संवारना है अगर तुमको गुलशने-हस्ती
तो पहले कांटों में उलझाओ जिन्दगानी को।



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