शेर-ओ-शायरी

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सदमा दिया तो सब्र की दौलत भी देगा वह,
किस चीज की कमी है सखी के खजाने में।

-यगाना चंगेजी
 

1.सखी - दाता, दानी, दानशील, फैयाज

 

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सब बाँध चुके कबके सरे-शाख नशेमन,
हम हैं कि गुलिस्ताँ की हवा देख रहे हैं।

जलील मनिकपुरी


1.सरे-शाख - डाल पर 2.नशेमन - घोंसला, नीड

 

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समझ तो ली है दुनिया की हकीकत,
मगर अब अपना दिल बहला रहा हूँ।

 

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समझती है मआले-गुल मगर क्या जोरे-फितरत है,
सहर आते ही कलियों पर तबस्सुम आ ही जाता है।


1.मआल - नियति, परिणाम, नतीजा, फल 2. जोरे-फितरत - नैसर्गिकता का जोर 3. सहर - सुबह, सबेरा 4.तबस्सुम - मुस्कान

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