शेर-ओ-शायरी

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सलीका आता है जिन्हें गमे-दौरां में जीने का,
वह यूँ शीशे को पत्थर से टकराया नहीं करते।

-'एहसन' कलीम

 

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सितारों से आगे जहाँ और भी है,
अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी है।
तही जिन्दगी से नहीं ये फिजाएं,
यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी है।

-मोहम्मद इकबाल


1.तही - खाली

 

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सीख ले फूलों से गाफिल मुद्दआ-ए जिन्दगी,
खुद महकना ही नहीं, गुलशन को महकाना भी है।

-'असर' लखनवी


1.गाफिल - (i) असावधान, बेखबर (ii) संज्ञाहीन, बेहोश (iii) काहिल, आलसी

2. मुद्दआ-ए जिन्दगी - जिन्दगी का मकसद

 

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सुनते हैं कि कांटों से गुलतक, है राह में लाखों वीराने,
कहता है मगर यह अज्मे-जुनू सहरा से गुलिस्ता दूर नहीं।


1.अज्म - हौसला, उत्साह, साहस, हिम्मत 2. सहरा - (i) वन, जंगल, कानन

(ii) मरूस्थल, रेगिस्तान

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