शेर-ओ-शायरी

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सूँघ कर कोई मसल डाले तो ये है गुल की जीस्त,
मौत उसके वास्ते डाली कुम्हलाने में है।

-आनन्द नारायण मुल्ला


1.जीस्त - जिंदगी

 

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सैलाब के सैलाब गुजर जाते हैं,
गिरदाब के गिरदाब गुजर जाते हैं।
आलमे-हवादिस से परीशाँ क्यों हो,
यह ख्वाब है और ख्वाब गुजर जाते हैं।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1. सैलाब - बाढ़, जल-प्लावन 2. गिरदाब - जलावर्त, भंवर

3. आलमे-हवादिस - मुसीबतों या परेशानियों के हालात

4. ख्वाब - स्वप्न, सपने

 

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हँसता हुआ कुहसारे-हवादिस से गुजर जा,
फिर देख कि तेरे लिये मैदां बहुत हैं।

-शकील बदायुनी


1.कुहसारे-हवादिस - दुर्घटनाओं के पहाड़

 

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हजार बर्क गिरें , लाख आँधियाँ उठें,
वह फूल खिलके रहेंगे, जो खिलने वाले हैं।

-साहिर लुधियानवी


1.बर्क - बिजली, तड़ित, चपला 

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