शेर-ओ-शायरी

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हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि, हर ख्वाहिश पै दिल निकले,
बहुत निकले मेरे अरमाँ लेकिन फिर भी कम निकले।

-मिर्जा गालिब

 

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हजार गम सही दिल में खुशी मगर यह है
 हमारे होठों पर माँगी हुई हँसी तो नहीं है।

 

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हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने,
इसी में वरना हरम है, इसी में बुतखाने।

-शाद अजीमाबादी


1.मुकामात - स्थान, जगह, ठहरने का स्थान, घर, मकान 2.बेगाना - अपरिचित, अनजान 3.हरम - काबा, खुदा का घर

 4. बुतखाना- मंदिर, मूर्तिगृह


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हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन,
दिल खुश रखने को 'गालिब' ये खयाल अच्छे हैं।

-मिर्जा गालिब

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