शेर-ओ-शायरी

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इशरते-सोहबते-खूबाँ ही गनीमत समझो,
न हुई 'गालिब' अगर उम्रे-तबीई न सही।

-मिर्जा गालिब


1. इशरते-सोहबते-खूबाँ - हसीनों की सोहबत का आनन्द

2.तबीई - प्राकृतिक
 

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उजाला तो हुआ कुछ देर को सहने-गुलिस्ताँ में,
बला से फूँक डाला बिजलियों ने आशियाँ मेरा।

-मिर्जा गालिब


1.सहन - आँगन

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उनको देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक,
वह समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।
हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन,
दिल को खुश रखने को 'गालिब' ये ख्यालअच्छा है।
-मिर्जा गालिब

 

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उनपै हँसिये शौक से जो माइले-फरियाद
हैं ,
उनसे डरिये जो सितम पर मुस्कुराकर रह गये।
-'असर' लखनवी

1.माइल - आसक्त, आशिक, प्रवृत्त, झुकाव रखने वाला आमादा
2. फरियाद - (i) सहायता के लिए पुकार, दुहाई (ii) शिकायत, परिवाद
(iii) आर्तनाद, दुख की आवाज (iv) नालिश, न्याय याचना।
3. सितम - जुल्म, अत्याचार


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