शेर-ओ-शायरी

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एक हँसती हुई परेशानी,
वाह क्या जिन्दगी हमारी है।
 

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एक लमहा भी मसर्रत का बहुत होता है,
लोग जीने का सलीका ही कहाँ रखते हैं।


1. मसर्रत - आनन्द, हर्ष, खुशी

 

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एहतिरामे-खिजाँ करो यारों,
यह नवेदे-बहार होती है।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.एहतिरामे-खिजाँ - पतझड़ ऋतु का स्वागत 2. नवेदे-बहार - बहार के आने की शुभ सूचना, बहार के आगमन की खुशखबरी

 

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ऐ गमे-दुनिया न हो नाराज,
मुझको आदत है मुस्कुराने की।

-अब्दुल हमीद अदम


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