शेर-ओ-शायरी

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ऐ शम्अ तेरी उम्र तवाई है एक रात,
रोकर गुजारा दे इसे, या हँसकर गुजार दे।

-अब्राहम जौक


1. तवाई - तवील, लंबी


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ऐ दिल जो हो सके तो लुत्फे-गम उठा ले,
तन्हाइयों में रो ले, महफिल में मुस्कुरा ले।
जिस दिन यह हाथ फैले अहले-करम के आगे,
ऐ काश उसके पहले हमको खुदा उठा ले।

-'शमीम' जयपुरी


1. अहले-करम - मेहरबानी करने वाले

 

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ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गई तू,
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे।
-फिराक गोरखपुरी

 

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ऐसा लगता है, हर इम्तिहाँ के लिए,
किसी ने जिन्दगी को हमारा पता दे दिया है।


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