शेर-ओ-शायरी

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कुछ लग्जिशों से काम जहाँ के संवर गये,
कुछ जुरअतें हयात पै इल्जाम बन गईं।
-'बाकी' सिद्दकी


1.लग्जिश - (i) फिसलन (ii) त्रुटि, भूल, गलती (iii) अपराध, कुसूर

2. जुरअत - (i) साहस, हिम्मत (ii) उत्साह, हौसला (iii) घृष्टता, दुस्साहस, बेबाकी 3.हयात - जिन्दगी 4. इल्जाम - (i) दोष, अपराध, जुर्म (ii) कोई बात अपने ऊपर या दूसरे पर आरोपित करना
 

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कुछ हसीं ख्वाब और कुछ आंसू,
उम्र भर की मेरी यही कमाई है।
-मजहर इमाम


1.ख्वाब - (i) सपना, स्वप्न (ii) सोने की क्रिया


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कैदे-हयातो-बंदे-गम अस्ल में दोनों एक हैं,
मौत से पहले आदमी गम से नजात पाये क्यों?
-मिर्जा 'गालिब'


1.कैदे-हयात - जीवन की कैद 2.बंदे-गम - गमों की कैद

 

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कोई दिन का मेहमां हूँ ऐ अहले-महफिल,
चिरागे – सहर हूँ, बुझा चाहता हूँ।
-मोहम्मद इकबाल


1.अहले-महफिल - महफिल वाले 2. चिरागे–सहर- सुबह का चिराग

 

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