शेर-ओ-शायरी

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खुदा गवाह है जिसको नसीब हो जाए,
हर एक दिल को गमे- जाविदां नहीं मिलता।
-'असर' सहबाई


1.गमे-जाविदां - शाश्वत गम, न खत्म होने वाला गम

 

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खुदा गवाह है दोनों हैं दुश्मने-परवाज,
गमे-कफस हो या राहत हो आशियाने की।
-गोपाल मित्तल


1.परवाज- उड़ान 2.गमे-कफस- पिंजड़े या कारागार में रहने का गम


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खुदा जाने यह दुनिया जल्वागाहे-नाज है किसकी,
हजारों उठ गये लेकिन वही रौनक है महफिल की।

 

जल्वागाहे-नाज - नाजोअदा का जल्वा दिखाने का स्थान
 

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खुशी के साथ रंजो-गम के भी एहसास बाकी है,
गुलों के शाख पर पत्ते नहीं, कांटे भी होते हैं।

-'साजन' पेशावरी

 

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