शेर-ओ-शायरी

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खुशी न गम के लिये है, न गम खुशी के लिये है,
यह फरेबे- मुसलसल है जिन्दगी के लिये।


1.फरेबे- मुसलसल - न खत्म होने वाला धोखा या छल या बहाना

 

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खुशी में अपनी खुशबख्ती कहाँ मालूम होती है,
कफस में जाके कद्रे-आशियाँ मालूम होती है।
-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.खुशबख्ती - खुशकिस्मती 2.कफस - पिंजड़ा


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खुशी, खुशी में, न गम में कोई मलाल मुझे

बना दिया है मुहब्बत ने बेमिसाल मुझे।
-अलम' मुजफ्फरनगरी


1.मलाल - कष्ट, तकलीफ
 

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गम अगर दिल को रास आ जाये,
शादमानी ही शादमानी है

-अब्दुल हमीद 'अदम

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,मानी - प्रसन्नता, हर्ष, खुशी


 

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