शेर-ओ-शायरी

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गम नहीं तो लज्जते-शादी नहीं,
बेअसीरी लुत्फे-आजादी नहीं।

-'असर' लखनवी


1.शादी - (i) हर्ष, आनन्द (ii) विवाह 2.बेअसीरी - बिना कैद
 

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गुन्चों के मुस्कुराने पर कहते हैं हंसके फूल,
अपना करो खयाल, हमारी तो कट गई।


1. गुंचा – कली

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गुबार उठता है यह कहता हुआ गोरे–गरीबाँ से,
जहाँ में एक दिन सबका यही अंजाम होता है।

-'आर्जू' लखनवी-
1.

गुबार - (i) धूल (ii) मनोमालिन्य, दिल का मैल 2. गोरे – गरीबाँ – गरीब या किसी परदेसी की कब्र या समाधि
 

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गुलों के साये में अक्सर 'रियाज' तड़पा हूँ,
करार कांटों पै कुछ ऐसा पा लिया मैंने।

-'रियाज' श्यामनगरी
 

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