शेर-ओ-शायरी

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जहने-फितरत में थी, जितनी नाकुशूदा उलझनें,
एक मर्कज पर सिमट आई तो इन्सां बना गया ।

-अब्दुल हमीद 'अदम'


1.जहन- बुद्धि, समझ, स्मरणशक्ति, याददाश्त 2.फितरत- प्रकृति, कुदरत

3. नाकुशूदा-न सुलझने वाला 4.मर्कज- केन्द्र
 

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जाने-अफसाना यही कुछ हो अफसाने का नाम,
जिन्दगी है दिलकी घड़कन तेज हो जाने का नाम।
कतरा-कतरा जिन्दगी के जहर का पीना है गम,
और खुशी हे दो घड़ी पीकर बहक जाने का नाम।

-आनन्द नारायण'मुल्ला'


1.जाने-अफसाना - कहानी की जान


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जिन्दगी इक आसुओं का जाम था,
पी गये कुछ और कुछ छलका गये।

 

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जिन्दगी और जिन्दगी की यादगार,
पर्दा और पर्दे के पीछे कुछ परछाइयाँ।

-'चकबस्त' लखनवी

 

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