शेर-ओ-शायरी

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जिन्दगी कब है साजगार हमें,
फिर भी कमबख्त से प्यार है हमें।

-नरेश कुमार 'शाद'


1.साजगार - अनुकूल, मुआफिक, जो बात रास आ जाए, मुबारक

 

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जिन्दगी कशमकशे-इश्क के आगाज का नाम,
मौत अंजाम इसी दर्द के अफसाने का।

-'अर्श' मल्सियानी


1.कशमकश- (i) खींचातानी, आपाधापी (ii) असमंजस, संकोच, दुविधा,

पसोपेश (iii) संघर्ष, लड़ाई (iv) दौड़-धूप 2. आगाज - आरम्भ, शुरूआत

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जिन्दगी क्या है अनासिर का जुहूरे-तर्तीब,
मौत क्या है, इन्हीं अजजाँ का परीशां होना।

- 'चकबस्त' लखनवी


1.अनासिर - पंचभूत या पंचतत्व-आग, पानी, हवा, मिटटी और आकाश

2. जुहूर - जाहिर होना, प्रकट होना 3. तर्तीब - (i) चन्द चीजों का यथास्थान ठीक-ठीक रखना, सज्जा, दरूस्ती (ii) क्रम, सिलसिला 4. अजजाँ - अंश, खंड, टुकड़े 5. परीशां - (i) अस्त-व्यस्त, तितर-बितर (ii) व्याकुल, आतुर, बेचैन
 

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जिन्दगी निकली मुसलसल इम्तिहाँ-दर-इम्तिहाँ,
जिन्दगी को दास्तां ही दास्तां समझा था मैं।

-'जिगर' मुरादाबादी


1.मुसलसल - लगातार, निरंतर

 

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