शेर-ओ-शायरी

<< Previous  ज़िन्दगानी (Life) Next >>

अय जिन्दगी खुदा के लिए अब मुआफ कर,
बैठी हुई है मौत मेरे इन्तिजार में।
-मुनव्वर लखनवी

 

*****

अश्क भी पीते हैं हम और बादा-ए-गुलफाम भी,
जिन्दगी अक्सर बदल लेती है अपने जाम भी।

 

1.अश्क - आँसू 2.बादा-ए-गुलफाम - गुलाबी रंग की शराब

 

*****

आने लगा हयात को अंजाम का खयाल,
जब आरजूएं फैलकर इक दाम बन गईं।

-बाकी सिद्दकी


1.हयात - जिन्दगी, जीवन 2.दाम - जाल, पाश, फंदा

 

*****

आसान नहीं इस दुनिया में ख्वाबों के सहारे जी लेना,
संगीन-हकीकत है दुनिया, यह कोई सुनहरा ख्वाब नहीं।

-सागर' निजामी


1.संगीन-  सख्त, कड़ा, कठोर।

*****

                 

<< Previous    page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-2829-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45-   Next>>