शेर-ओ-शायरी

<< Previous  ज़िन्दगानी (Life)  Next>>

जिन्दगी वक्फा है तेरे हिज्र का,
मौत तेरे वस्ल का पैगाम है।

-'असर' लखनवी


1.वक्फा - (i) दो कामों के बीच में ठहराव का समय, विराम, इंटरभल

(ii) विलंब, ठहराव 2. हिज्र - वियोग, विरह, जुदाई, फिराक

3.वस्ल - मिलन, संयोग


*****

 

जिन्दगी है रूह को महदूद कर लेने का नाम,
मौत है इन्सान का लामहदूद हो जाने का नाम।

-'जोश' मलीहाबादी


1.महदूद- सीमित, हद के भीतर 2. लामहदूद- असीमित, जिसकी कोई सीमा या हद न हो

 

*****

जिस शक्ल में जीस्त को तुम चाहो ढाल लो,
फूलों का सेज है, यही कांटों का तख्त है।


1.जीस्त - जिन्दगी

 

*****
 

जीने की हवस बढ़ जाती है कुछ शायद उम्र के ढलने से,
लौ देती जितनी जितनी ही, यह शम्अ पिघलती जाती है।

-'मुनव्वर' लखनवी


1. हवस - (i) उत्कंठ, लालसा (ii) लोभ, लालच

 

*****

<< Previous    page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-2829-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45  Next>>