शेर-ओ-शायरी

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जीस्त भी इक हसीना से कम नहीं यारों,
प्यार है उससे तो फिर नाज उठाते जाइए।

-वजीर अफसर


1.जीस्त - जिन्दगी, जीवन


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जुज शौके-तलब, जुज शौके-सफर, कुछ और मुझे मंजूर नहीं,
ऐ इश्क बता अब क्या होगा, कहते हैं कि मंजिल दूर नहीं।

-'जिगर' मुरादाबादी


1.जुज- अतिरिक्त, अलावा, सिवाय 2.शौके-तलब- ख्वाहिशों को पालने की चाहत

 

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जो दर्द से वाकिफ हैं वह खूब समझते हैं,
राहत में तुझे खोया, तकलीफ में पाया है।

-'अख्तर' अंसारी

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जो नख्ल पुरसमर हैं, वो सर उठा सकते नहीं,
सरकश हैं वो दरख्त, जिस पर समर नहीं ।


1. नख्ल - वृक्ष, पेड़ 2. पुरसमर - फलों से लदे हुए 3. सरकश -

सर उठाए हुए, उद्दंड , बागी, अवज्ञाकारी 4. समर - फल
 

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