शेर-ओ-शायरी

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ठहरता नही जिन्दगी का सफीना,
यही इस जहाँ का है अक्सर करीना।
है बेताब-ओ-बेचैन रहना ही जीना,
यह हर लहजा करती हैं मौजें इशारे।

-अफसर मेरठी


1.सफीना - नाव, नौका, कश्ती 2.करीना - ढंग, तर्ज 3. मौज - लहर


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तआरूफ रोग हो जाए तो उसको भूलना बेहतर,
तअल्लुक बोझ बन जाये तो उसको छोड़ना अच्छा।
वह अफसाना जिसे तकमील तक लाना न हो मुमकिन,
उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा।

-साहिर लुधियानवी


1.तआरूफ - (i) एक दूसरे को पहचानना, परिचय, जान-पहचान

2.तअल्लुक - (i) स्वजनता, रिश्तेदारी (ii) संबंध, संपर्क, लगाव

 3.तकमील - पूर्ति, समाप्ति
 

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तिफ्ल-ए-शीरख्वार को ज्यों-ज्यों शऊर हो चला,
जितना खुदा के पास था, उतना ही दूर हो चला।


1.तिफ्ल-ए-शीरख्वार - दूध पीने वाला बच्चा, दूधमूंहा, स्तनपायी

 

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तुझको है फिक्रे-तनआसानी 'असर',
जिन्दगी कुर्बानियों का नाम है।

-'असर' लखनवी


1.तनआसानी - आरामतलबी, शारीरिक सुख

 

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