शेर-ओ-शायरी

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तू राह में सोता है वो भी तो मुसाफिर है,
मंजिल पे पहुँचकर जो आराम नहीं करते।

-'आरिफ' बीकानेरी

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दिखावे के है ये सब दुनिया के मेले,
भरी बज्म में हम रहे हैं अकेले।
 

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दिल के लिये हयात का पैगाम बन गईं,
बैचैनियाँ सिमट के तेरा नाम बन गईं।


1. हयात - जिन्दगी, जीवन
 

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दिल को बर्बाद किये जाती है गम बदस्तूर किये जाती है,
मर चुकीं सारी उम्मीदे, आरजू है कि जिये जाती है।

-'असर' लखनवी


1.बदस्तूर - पहले की तरह, यथावत, यथापूर्व


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