शेर-ओ-शायरी

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पजमुर्दा होके फूल गिरा शाख से तो क्या,
वह मौत है हसीन, आए जो, शबाब में।

-असर लखनवी


1.पजमुर्दा- खिन्न, मलिन, उदास (मुर्झाकर) 2. शबाब- जवानी, युवावस्था


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पत्थर तो रोज आते ही रहते हैं सहन में,
हल इसका यह नहीं है कि घर छोड़ दीजिए।


1.सहन - आँगन

 

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पहलू-ए-गुल में खार भी हैं कुछ छुपे हुए,
हुस्ने-बहार देख तो दामन बचा के देख।

-'दिल' शाहजहाँपुरी

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फना का होश आना जिन्दगी का दर्दे-सर जाना,
अजल क्या है, खुमारे-बादा-ए-हस्ती उतर जाना।

-चकबस्त लखनवी


1.फना- (i) मृत्यु, मरण, मौत (ii) नष्ट, बरबाद, गायब 2.अजल- मृत्यु,

मरण, मौत 3.खुमार - नशे के उतार की अवस्था, 

4.बादा-ए-हस्ती - जिन्दगी की शराब
 

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